Last updated: August 21st, 2026 at 07:51 am

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की संभावित रिहाई को लेकर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और इमरान खान के करीबी सहयोगी जुल्फिकार बुखारी ने कहा है कि जेल से बाहर आने के बाद इमरान खान सेना या सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ सीधा टकराव नहीं चाहेंगे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब इमरान खान और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। PTI समर्थक भी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के खिलाफ कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।
सेना से टकराव को लेकर क्या बोले PTI नेता?
रॉयटर्स के मुताबिक, जुल्फिकार बुखारी ने एक इंटरव्यू में इमरान खान के संभावित रुख को लेकर कहा कि यदि उन्हें रिहा किया जाता है तो वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिससे देश को नुकसान पहुंचे।
उन्होंने संकेत दिया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सेना या सरकार के शीर्ष नेतृत्व से सीधे टकराव से बचना बेहतर होगा। बुखारी ने इसे देश के हित में संयम बरतने की जरूरत के तौर पर पेश किया।
PTI के पुराने रुख से कितना अलग है बयान?
इमरान खान की पार्टी और सेना के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। खासकर 2023 में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ गया था।
PTI लगातार इमरान खान के खिलाफ दर्ज मामलों और उनकी गिरफ्तारी को राजनीतिक कार्रवाई बताती रही है। वहीं, पाकिस्तानी सरकार और सेना का कहना रहा है कि खान से जुड़े मामले न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
ऐसे माहौल में बुखारी का सुलह और टकराव से बचने का संकेत PTI की रणनीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या इमरान खान भी यही रुख अपनाएंगे?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जुल्फिकार बुखारी का बयान इमरान खान की व्यक्तिगत रणनीति को दर्शाता है या यह पार्टी की संभावित राजनीतिक रणनीति का संकेत है। इमरान खान लंबे समय से सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लेकर सार्वजनिक रूप से तीखी टिप्पणियां करते रहे हैं।
इसलिए अगर इमरान खान जेल से बाहर आते हैं और PTI वास्तव में सेना के साथ टकराव कम करने की नीति अपनाती है, तो पाकिस्तान की राजनीति में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
सेना और सरकार की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं
बुखारी के बयान पर पाकिस्तानी सरकार या सेना की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। पाकिस्तानी सेना पहले भी राजनीति में किसी तरह की भूमिका से इनकार करती रही है, जबकि सरकार इमरान खान से जुड़े मामलों को अदालतों के अधिकार क्षेत्र का विषय बताती है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि इमरान खान की रिहाई की स्थिति में PTI अपने राजनीतिक रुख को किस दिशा में ले जाती है और क्या सेना के साथ लंबे समय से चले आ रहे टकराव को कम करने की कोशिश वास्तव में शुरू होती है।
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