Last updated: May 20th, 2026 at 12:55 pm

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने India-Nordic Summit के दौरान नॉर्डिक देशों के साथ कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच ग्रीन टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन, क्लाइमेट पार्टनरशिप, रक्षा सहयोग और 6G रिसर्च जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस बैठक को भारत की विदेश नीति और तकनीकी भविष्य के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में नई तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक विकास के क्षेत्र में भी दोनों पक्ष मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बेहद जरूरी हो गया है।
इस सम्मेलन में नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने नॉर्डिक देशों के साथ मिलकर ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नई पहल शुरू करने की बात कही।
भारत और नॉर्डिक देशों के बीच 6G टेक्नोलॉजी को लेकर हुई चर्चा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में 6G दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति साबित हो सकती है। ऐसे में भारत का शुरुआती स्तर पर इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी करना भविष्य के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत स्टार्टअप, डिजिटल इनोवेशन और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बैठक के दौरान रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर भी कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए साझा प्रयासों पर जोर दिया। इसके अलावा आर्कटिक क्षेत्र में रिसर्च और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहमति बनी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन भारत की बदलती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने पर खास ध्यान दिया है। इसी रणनीति के तहत नॉर्डिक देशों के साथ भी आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई दिशा दी जा रही है।
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि इन समझौतों का फायदा भारत के टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और स्टार्टअप सेक्टर को मिल सकता है। नॉर्डिक देश ग्रीन टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में दुनिया के सबसे उन्नत देशों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके अनुभव और निवेश से भारत को बड़े स्तर पर फायदा मिलने की संभावना है।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय देश की पहचान और संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग मौजूद रहे और प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
सोशल मीडिया पर भी India-Nordic Summit की काफी चर्चा देखने को मिली। कई लोगों ने इसे भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं ने देश के अंदरूनी मुद्दों जैसे बेरोजगारी और महंगाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि सरकार समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भागीदारी देश की मजबूत होती वैश्विक स्थिति का संकेत है।
फिलहाल इस शिखर सम्मेलन को भारत और नॉर्डिक देशों के बीच संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले समय में टेक्नोलॉजी, व्यापार, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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