Last updated: June 22nd, 2026 at 09:11 am

NEET UG री-एग्जाम के दौरान बिहार के लखीसराय जिले में एक बड़े सॉल्वर रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 14 बायोमैट्रिक कंपनी के कर्मचारी और 5 मेडिकल छात्र शामिल बताए जा रहे हैं।
यह मामला तब सामने आया जब परीक्षा केंद्रों पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा दिलाने की योजना पर काम कर रहा था।
बायोमैट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर रची गई साजिश
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह ने परीक्षा केंद्रों की बायोमैट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगाकर फर्जी उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठाने की व्यवस्था की थी। बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में तकनीकी कर्मचारियों की मिलीभगत भी शामिल थी, जिससे आसानी से नकली परीक्षार्थियों को एंट्री मिल सकी।
30 लाख रुपये तक में तय हुआ था सौदा
सूत्रों के मुताबिक, इस रैकेट में असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के लिए 30 लाख रुपये तक का सौदा किया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि कई केंद्रों पर फर्जी उम्मीदवारों को वास्तविक छात्रों के स्थान पर बैठाया गया।
कैसे हुआ पूरे गिरोह का खुलासा
पुलिस को सबसे पहले हाजीपुर निवासी और पीएमसीएच के छात्र मयंक कश्यप पर संदेह हुआ, जो बायोमैट्रिक कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया था। उसके बाद जांच आगे बढ़ी और पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।
मास्टरमाइंड और बड़े नामों की पहचान
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे रैकेट का संचालन पावापुरी मेडिकल कॉलेज, राजगीर के छात्र रविशंकर द्वारा किया जा रहा था। वहीं, इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड अर्पित राज बताया जा रहा है, जो गया मेडिकल कॉलेज का छात्र है और 2024 के NEET पेपर लीक मामले में भी उसका नाम सामने आ चुका है।
कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क
पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस पूरे गिरोह के नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह रैकेट केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका कनेक्शन अन्य राज्यों तक भी फैला हो सकता है। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले की जांच तेज कर दी गई है।
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