Last updated: April 15th, 2026 at 11:12 am

पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद से हट चुके हैं, और उनकी जगह सम्राट चौधरी ने संभाल ली है। इस बदलाव ने राज्य की सियासत में नई दिशा की शुरुआत कर दी है।
सम्राट चौधरी एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के जाने-माने समाजवादी नेता रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में विधानसभा और लोकसभा दोनों में प्रतिनिधित्व किया, लेकिन मुख्यमंत्री बनने का सपना उनका अधूरा ही रह गया।
बेटे के मुख्यमंत्री बनने पर शकुनी चौधरी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह पल उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि जो मुकाम वह खुद हासिल नहीं कर सके, उसे उनके बेटे ने हासिल कर लिया है।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्षों तक सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर काम किया। लव-कुश समीकरण को मजबूत करने और विभिन्न राजनीतिक दलों के निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही। इसके बावजूद वे मुख्यमंत्री पद तक नहीं पहुंच पाए।
शकुनी चौधरी ने इस उपलब्धि का श्रेय बड़े नेताओं के विश्वास को भी दिया। उन्होंने नरेंद्र मोदी, अमित शाह और नीतीश कुमार के समर्थन को इस सफलता का प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि जब अलग-अलग विचारधारा वाले दल किसी एक नेता पर सहमत होते हैं, तो यह उस नेता की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। सम्राट चौधरी ने न केवल अपनी पार्टी, बल्कि पूरे गठबंधन और जनता का भरोसा जीतकर यह मुकाम हासिल किया है।
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