Last updated: June 24th, 2026 at 04:21 am

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार पर भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हाल के कुछ मामलों में सरकार केवल दिखावटी कार्रवाई कर रही है, जबकि बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। सांसद ने भरत तिवारी एनकाउंटर को भी सवालों के घेरे में बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
रिशु श्री मामले में कार्रवाई पर उठाए सवाल
मीडिया से बातचीत में सुधाकर सिंह ने कहा कि रिशु श्री प्रकरण में कुछ अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है, जबकि मामले से जुड़े बड़े नामों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रभावशाली अधिकारियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद जांच एजेंसियां अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रही हैं।
बड़े अधिकारियों और परियोजनाओं को लेकर लगाए आरोप
राजद सांसद ने दावा किया कि राज्य की कई बड़ी परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है और इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नगर विकास और गंगा सफाई जैसी योजनाओं में खर्च हुए धन की भी पारदर्शी समीक्षा की जानी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच की मांग
सुधाकर सिंह ने भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। सांसद ने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े कई तथ्यों की गहराई से जांच की आवश्यकता है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
राजद सांसद ने दावा किया कि उन्हें पहले भी कुछ मामलों को लेकर धमकियां मिली थीं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
हालांकि, सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों पर अभी तक राज्य सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
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