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करीब 50 साल बाद गुरेज़ घाटी में लौटा हॉर्स पोलो, पारंपरिक खेल को मिला नया जीवन

जम्मू-कश्मीर के गुरेज़ घाटी में लगभग पाँच दशकों के लंबे अंतराल के बाद पारंपरिक हॉर्स पोलो की शानदार वापसी हुई
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जम्मू-कश्मीर के गुरेज़ घाटी में लगभग पाँच दशकों के लंबे अंतराल के बाद पारंपरिक हॉर्स पोलो की शानदार वापसी हुई है। लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के निकट स्थित बक्तूर गांव में भारतीय सेना की पहल पर आयोजित इस विशेष प्रतियोगिता ने स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल बना दिया।

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    इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं, पोलो खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने भाग लिया। लंबे समय बाद इस ऐतिहासिक खेल को दोबारा मैदान में देखने का अवसर मिलने से लोगों ने इसे गुरेज़ की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    एक समय गुरेज़ घाटी में हॉर्स पोलो बेहद लोकप्रिय खेल माना जाता था, लेकिन बदलती परिस्थितियों और नियमित आयोजनों के अभाव में यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्त हो गई थी। अब इस खेल की वापसी ने क्षेत्र की पुरानी सांस्कृतिक पहचान को फिर से जीवंत कर दिया है।

    भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य स्थानीय खेल संस्कृति को संरक्षित करना, युवाओं को अपनी परंपराओं से जोड़ना और सीमावर्ती क्षेत्रों में सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना है। उनका कहना है कि ऐसे आयोजन युवाओं में खेल भावना विकसित करने के साथ-साथ सेना और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास और सहयोग को भी बढ़ावा देते हैं।

    स्थानीय निवासियों ने इस पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में हॉर्स पोलो प्रतियोगिताएं नियमित रूप से आयोजित होंगी और गुरेज़ घाटी एक बार फिर इस पारंपरिक खेल की पहचान बनेगी।

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