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गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी में संदिग्ध धमाका, यूपी ATS और फॉरेंसिक टीमें जांच में जुटीं; सोशल मीडिया पर संगठन का दावा

  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में दिवाली से ठीक पहले वसुंधरा पुलिस चौकी के पास हुए संदिग्ध धमाके ने
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    उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में दिवाली से ठीक पहले वसुंधरा पुलिस चौकी के पास हुए संदिग्ध धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। शुक्रवार, 6 नवंबर की रात करीब 9 बजे इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली वसुंधरा पुलिस चौकी में तेज धमाका हुआ। इससे चौकी की दो खिड़कियों के शीशे टूट गए और दीवार के एक हिस्से में दरार आ गई। घटना के समय चौकी के अंदर एक सब-इंस्पेक्टर और एक डिलीवरी कर्मचारी मौजूद थे। कांच के टुकड़े लगने से डिलीवरी कर्मचारी घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

     

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की टीम ने भी जांच शुरू कर दी है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल समेत अन्य एजेंसियां भी घटनाक्रम से जुड़े संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस चौकी के आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित कर साक्ष्य जुटाए गए हैं।

     

    गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई थी। शुरुआती जांच में चौकी की दो खिड़कियों के शीशे टूटने और दीवार में दरार आने की पुष्टि हुई है। हालांकि, किसी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई। डिलीवरी कर्मचारी को कांच के टुकड़े लगने से मामूली चोटें आई थीं और उपचार के बाद उसकी स्थिति ठीक बताई गई है।

     

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई, जिसमें कथित तौर पर ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ नाम के संगठन ने धमाके की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। पोस्ट एक एक्स अकाउंट के जरिए साझा की गई थी। इसमें पुलिस चौकी को दोबारा निशाना बनाने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे की सत्यता की जांच की जा रही है। अभी तक किसी संगठन की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

     

    गाजियाबाद के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल से फॉरेंसिक नमूने एकत्र किए गए हैं और उन्हें विस्तृत जांच के लिए आगरा स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। बम निरोधक दस्ते ने भी मौके का निरीक्षण किया। शनिवार को डीसीपी रिजुल कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में घटनास्थल से विस्फोटक सामग्री, बारूद या किसी रासायनिक अवशेष के निशान नहीं मिले हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रही हैं।

     

    धमाके के कारण को लेकर अलग-अलग संभावनाओं पर जांच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि दिवाली के पटाखे के किसी हिस्से के एसी यूनिट में पहुंचने से विस्फोट हुआ हो सकता है। वहीं, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना के पीछे किसी व्यक्ति या संगठन की सुनियोजित साजिश तो नहीं थी। अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

     

    जांचकर्ताओं के सामने एक चुनौती घटनास्थल के आसपास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की है। पुलिस आसपास के कैमरों और चौकी के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगे कैमरे की रिकॉर्डिंग की जांच कर रही है। इसके अलावा, गाजियाबाद के एक एलिवेटेड रोड पर खड़े मिले संदिग्ध दोपहिया वाहन की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि वाहन का धमाके से कोई संबंध है या नहीं।

     

    गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और कहा कि मामले की हर संभावित दिशा से जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस, बम निरोधक दस्ता और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने साक्ष्य जुटाए हैं। जांच पूरी होने और रिपोर्ट आने के बाद ही धमाके की वास्तविक प्रकृति तथा कारण स्पष्ट हो सकेंगे।

     

    दिवाली से पहले पुलिस चौकी में हुई इस घटना ने जिले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस ने लोगों से अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट और अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की है। जांच एजेंसियों का ध्यान धमाके के स्रोत का पता लगाने, सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाले दावे की पुष्टि करने और घटना में शामिल संभावित लोगों की पहचान करने पर केंद्रित है।

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