Last updated: July 12th, 2026 at 06:22 pm

बिहार की राजनीति में जनता दल (यूनाइटेड) ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी के करीबी माने जाने वाले छोटू सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। छोटू सिंह लंबे समय से जदयू की गतिविधियों में सक्रिय थे और कई प्रमुख कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भी दिखाई देते रहे थे। हाल के दिनों में उन्हें पार्टी की बैठकों और सरकारी कार्यक्रमों से दूर रखा गया था, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं।
जदयू के संगठनात्मक निर्णय के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर चल रहे पुनर्गठन से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को संगठन के नियमों का पालन करना होगा। हालांकि जदयू ने निष्कासन के पीछे विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताए हैं।
सूत्रों के अनुसार, छोटू सिंह ने कुछ समय पहले जदयू की राज्य कार्यकारिणी से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ही उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी की चर्चाएं तेज हो गई थीं। हाल ही में उन्हें मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की बैठकों में शामिल होने से भी रोका गया था। इसके बाद यह माना जा रहा था कि पार्टी उनके खिलाफ कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अब निष्कासन के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जदयू अपने संगठन को पूरी तरह अनुशासित और सक्रिय रखना चाहती है। पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ नए संगठनात्मक ढांचे पर काम कर रही है। हाल ही में जदयू ने राज्य स्तरीय समिति का पुनर्गठन भी किया है, जिसमें विभिन्न सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। इसे आगामी चुनावों की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को लेकर जदयू पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि पार्टी के भीतर लगातार असंतोष बढ़ रहा है और यह निष्कासन उसी का संकेत है। वहीं जदयू नेताओं का कहना है कि संगठनात्मक फैसलों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है और पार्टी पूरी तरह एकजुट होकर आगामी चुनाव की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव से पहले बड़े दलों में संगठनात्मक बदलाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। जदयू भी अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लगातार समीक्षा कर रही है। आने वाले महीनों में पार्टी में और भी संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि बिहार की राजनीति धीरे-धीरे चुनावी मोड में प्रवेश कर रही है।
फिलहाल छोटू सिंह के निष्कासन ने बिहार की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जदयू इस फैसले के बाद अपने संगठन को किस तरह आगे बढ़ाती है और विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी राजनीति में किस प्रकार उठाता है। आगामी दिनों में पार्टी की रणनीति और संभावित नए संगठनात्मक फैसलों पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर बनी रहेगी।
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