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दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर, GRAP-3 लागू; निर्माण कार्यों पर रोक और पुराने वाहनों पर सख्ती

  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। दिवाली से
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    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। दिवाली से पहले हवा की गुणवत्ता बिगड़ने और आने वाले दिनों में प्रदूषण और बढ़ने की आशंका को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण यानी GRAP-3 को लागू कर दिया है। यह आदेश 6 नवंबर 2026 को तत्काल प्रभाव से पूरे दिल्ली-NCR में लागू किया गया। इसके तहत निर्माण गतिविधियों, पुराने वाहनों और प्रदूषण फैलाने वाले अन्य स्रोतों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।

     

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 दर्ज किया गया था। यह बहुत खराब श्रेणी में आता है और गंभीर श्रेणी की सीमा से केवल 19 अंक नीचे था। इससे पहले गुरुवार को दिल्ली का AQI 369 दर्ज किया गया था। शनिवार सुबह भी राजधानी की हवा की स्थिति चिंताजनक बनी रही। सुबह 9:30 बजे दिल्ली का औसत AQI 364 दर्ज किया गया। हालांकि औसत स्तर में मामूली सुधार दिखाई दिया, लेकिन कई निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण गंभीर श्रेणी में बना रहा।

     

    शनिवार सुबह IIT दिल्ली का AQI 443, पंजाबी बाग का 433 और नरेला का 409 दर्ज किया गया। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रही। वहीं, कैंटोनमेंट एरिया और धौला कुआं में भी प्रदूषण का स्तर बहुत खराब दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौसम में बदलाव, हवा की धीमी गति और वातावरण में प्रदूषक कणों के जमा होने से स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

     

    GRAP-3 लागू होने के बाद पूरे दिल्ली-NCR में गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। इसमें खुदाई, मिट्टी का काम, भवन निर्माण, सड़क निर्माण और बड़े स्तर पर मरम्मत जैसे कार्य शामिल हैं। हालांकि, आवश्यक सार्वजनिक परियोजनाओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े कुछ कार्यों को निर्धारित शर्तों के तहत छूट दी जा सकती है। स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियों पर भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई लागू होगी।

     

    वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए भी सख्त कदम उठाए गए हैं। दिल्ली में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल से चलने वाले चार पहिया हल्के मोटर वाहनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह पाबंदी एनसीआर के कुछ निर्धारित जिलों में भी लागू होगी। पुराने मालवाहक वाहनों और दूसरे राज्यों में पंजीकृत कुछ डीजल व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही पर भी सख्ती की गई है। हालांकि, नियमों में निर्धारित आवश्यक सेवाओं और छूट प्राप्त वाहनों को राहत दी गई है।

     

    प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रशासन को सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली मेट्रो की सेवाओं और बसों की उपलब्धता बढ़ाने जैसे कदमों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि निजी वाहनों का इस्तेमाल कम हो सके। इसके अलावा, सड़कों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन और सफाई अभियान तेज करने की जरूरत बताई गई है।

     

    GRAP-3 के तहत स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं को हाइब्रिड मोड में संचालित करने का विकल्प भी दिया गया है। इसके अंतर्गत कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई में से विकल्प उपलब्ध कराया जा सकता है। दिल्ली और एनसीआर की राज्य सरकारों को सरकारी, नगर निगम और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू करने पर निर्णय लेने को भी कहा गया है।

     

    CAQM ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, कम दूरी के लिए पैदल चलने या साइकिल का इस्तेमाल करने और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने की अपील की है। घरों और खुले स्थानों पर कोयले तथा लकड़ी जलाने से बचने की सलाह भी दी गई है। सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

     

    मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान के अनुसार, 7 से 9 नवंबर के बीच दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी तक पहुंच सकती है। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं स्थिति को और खराब कर सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू कराने की बड़ी चुनौती है।

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