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प्रयागराज में TGT-PGT अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन, बैरिकेडिंग तोड़ शिक्षा निदेशालय में घुसे; पुरानी नियमावली से भर्ती कराने की मांग

  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती को लेकर प्रतियोगी अभ्यर्थियों का आंदोलन मंगलवार को उग्र हो गया।
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    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती को लेकर प्रतियोगी अभ्यर्थियों का आंदोलन मंगलवार को उग्र हो गया। पुरानी नियमावली के तहत भर्ती प्रक्रिया में एक और अवसर देने की मांग कर रहे अभ्यर्थियों ने शिक्षा निदेशालय के सामने प्रदर्शन किया। अधिकारियों से लिखित आश्वासन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग हटाई और शिक्षा निदेशालय परिसर में प्रवेश कर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान परिसर में नारेबाजी हुई और कुछ फर्नीचर को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा।

     

    अभ्यर्थियों का कहना है कि टीजीटी और पीजीटी भर्ती से संबंधित नियमों में बदलाव के कारण पुराने नियमों के तहत तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। वे चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया में उन्हें पुरानी नियमावली के अनुसार एक और अवसर दिया जाए, ताकि लंबे समय से परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को नुकसान न उठाना पड़े। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, उन्होंने पहले भी अपनी मांगों को अधिकारियों के सामने रखा था, लेकिन उन्हें अब तक ऐसा लिखित आश्वासन नहीं मिला जिससे उनकी चिंता दूर हो सके।

     

    आंदोलन में शामिल प्रतियोगी छात्रों ने आरोप लगाया कि नई नियमावली को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। कई अभ्यर्थी लंबे समय से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं और इस प्रक्रिया में समय, धन तथा मेहनत लगा चुके हैं। उनका कहना है कि नियमों में बदलाव का असर उन उम्मीदवारों पर पड़ सकता है जो पुराने प्रावधानों के आधार पर परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे थे। इसी वजह से अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार और संबंधित भर्ती एजेंसियां उनकी मांग पर स्पष्ट निर्णय लें।

     

    प्रयागराज स्थित शिक्षा निदेशालय के बाहर प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने के बाद आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया। रिपोर्टों के अनुसार, 100 से अधिक अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग पार कर परिसर में प्रवेश किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। कुछ रिपोर्टों में परिसर के फर्नीचर को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, आंदोलन के दौरान किसी के गंभीर रूप से घायल होने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।

     

    प्रदर्शन की सूचना मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और अभ्यर्थियों को शांत कराने का प्रयास किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिविल लाइंस पुलिस ने सरोजिनी नायडू मार्ग पर यातायात को डायवर्ट किया, ताकि प्रदर्शन के कारण सड़क पर जाम न लगे। शिक्षा निदेशालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई। प्रशासन की कोशिश रही कि प्रदर्शन के कारण आम लोगों और राहगीरों को कम से कम परेशानी हो तथा किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

     

    अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं, लेकिन लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद स्पष्ट निर्णय नहीं होने से उनकी नाराजगी बढ़ी है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार से भर्ती नियमों की स्थिति स्पष्ट करने और पुराने नियमों के तहत एक अतिरिक्त अवसर देने की मांग दोहराई।

     

    टीजीटी और पीजीटी भर्ती उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। भर्ती नियमों में बदलाव, परीक्षा की प्रक्रिया और पात्रता को लेकर किसी भी प्रकार की अनिश्चितता अभ्यर्थियों की तैयारी को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में सरकार और संबंधित भर्ती संस्थाओं की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना जरूरी होता है, ताकि उम्मीदवारों को अपनी पात्रता और आगे की प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी मिल सके।

     

    प्रयागराज में अभ्यर्थियों का आंदोलन भर्ती नियमों को लेकर जारी असंतोष को उजागर करता है। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी नियमावली के तहत एक और अवसर देने की मांग की है, जबकि इस मांग पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी विभागों और भर्ती प्राधिकरणों को लेना है। अभ्यर्थियों की मांगों पर प्रशासन की ओर से किसी ठोस लिखित आश्वासन की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। आने वाले दिनों में सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत तथा भर्ती प्रक्रिया को लेकर होने वाला निर्णय इस आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।

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