Last updated: October 28th, 2026 at 03:21 pm

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विमान संचालन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को एयरपोर्ट पर प्रस्तावित समानांतर टैक्सी ट्रैक के 804 मीटर लंबे हिस्से का उद्घाटन किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य विमानों को रनवे से हटाने और अन्य परिचालन क्षेत्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। इससे रनवे पर विमानों के रुकने का समय कम होने और उड़ानों के संचालन में सुधार आने की उम्मीद है। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, इस हिस्से को गुरुवार आधी रात से परिचालन के लिए उपलब्ध कराया जाना निर्धारित है।
लखनऊ एयरपोर्ट पर बढ़ती हवाई यातायात गतिविधियों को देखते हुए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। समानांतर टैक्सी ट्रैक इसी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूरी परियोजना की लंबाई 2,864 मीटर निर्धारित की गई है। इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है, ताकि निर्माण कार्य के दौरान एयरपोर्ट की सामान्य गतिविधियों पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े। बुधवार को उद्घाटित किया गया 804 मीटर का हिस्सा इस परियोजना का प्राथमिक चरण है, जबकि शेष हिस्से का उद्घाटन मार्च 2027 के अंत तक किए जाने की योजना है।
समानांतर टैक्सी ट्रैक का मुख्य उद्देश्य रनवे पर विमानों की आवाजाही को व्यवस्थित करना है। सामान्य तौर पर विमान उतरने के बाद रनवे से बाहर निकलकर टैक्सीवे के माध्यम से पार्किंग स्थल या दूसरे परिचालन क्षेत्र तक पहुंचते हैं। यदि विमान को रनवे खाली करने में अधिक समय लगता है, तो पीछे आने वाले विमानों की लैंडिंग और उड़ान भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। समानांतर टैक्सी ट्रैक उपलब्ध होने से विमानों को रनवे से हटाने की प्रक्रिया अधिक सुचारु बनाई जा सकती है। इससे रनवे पर अन्य विमानों के लिए जगह जल्दी उपलब्ध होने की संभावना बढ़ती है।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, इस सुविधा से रनवे पर विमानों के रहने का समय कम करने और ग्राउंड ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव एयरलाइंस की समयबद्धता पर भी पड़ सकता है। हालांकि, उड़ानों में देरी केवल रनवे की उपलब्धता पर निर्भर नहीं करती। मौसम, हवाई यातायात नियंत्रण, तकनीकी कारण और अन्य परिचालन परिस्थितियां भी उड़ानों के समय को प्रभावित करती हैं। इसलिए नई सुविधा से देरी में कितनी कमी आएगी, इसका वास्तविक आकलन परिचालन शुरू होने के बाद ही किया जा सकेगा।
इस परियोजना को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के समन्वय से विकसित किया जा रहा है। एयरपोर्ट प्रशासन का लक्ष्य विमानों की बढ़ती आवाजाही के अनुरूप जमीन पर उपलब्ध परिचालन सुविधाओं को मजबूत करना है। लखनऊ एयरपोर्ट पर नियमित व्यावसायिक उड़ानों के अलावा सामान्य विमानन और गैर-नियमित उड़ानों का भी संचालन होता है। ऐसे में रनवे और टैक्सीवे के बेहतर प्रबंधन से एयरपोर्ट की समग्र कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है।
लखनऊ एयरपोर्ट का महत्व केवल उत्तर प्रदेश की राजधानी तक सीमित नहीं है। मौसम संबंधी व्यवधानों के दौरान दिल्ली, वाराणसी और अन्य शहरों के लिए निर्धारित कुछ विमानों को वैकल्पिक रूप से लखनऊ की ओर मोड़ा जा सकता है। ऐसी परिस्थितियों में विमानों को जमीन पर संभालने और परिचालन क्षेत्रों के बीच उनकी आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं जरूरी होती हैं। समानांतर टैक्सी ट्रैक इस जरूरत को पूरा करने में सहायक हो सकता है।
पूरी 2,864 मीटर लंबी परियोजना के मार्च 2027 के अंत तक पूरा होने की योजना है। शेष हिस्से के निर्माण और उद्घाटन के बाद विमान संचालन के लिए अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध होगी। इससे एयरपोर्ट पर जमीन पर होने वाली गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, नई सुविधा के प्रभाव का दायरा इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इसे मौजूदा रनवे, टैक्सीवे और अन्य परिचालन व्यवस्थाओं के साथ किस प्रकार जोड़ा जाता है।
लखनऊ एयरपोर्ट पर समानांतर टैक्सी ट्रैक का विकास शहर की विमानन सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 804 मीटर के प्राथमिक हिस्से का उद्घाटन परियोजना की प्रगति को दर्शाता है। इसके परिचालन में आने के बाद विमान संचालन की दक्षता, रनवे के उपयोग और उड़ानों की समयबद्धता में सुधार की उम्मीद है। अब यात्रियों और एयरलाइंस की नजर इस सुविधा के वास्तविक प्रभाव तथा शेष परियोजना के निर्धारित समय पर पूरा होने पर रहेगी।
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