Last updated: July 17th, 2026 at 04:30 pm

पर्यावरण कार्यकर्ता, शिक्षा सुधारक और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में पहुंच गई। उन्होंने घोषणा की है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो वे 20 जुलाई को अपने समर्थकों के साथ संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च करेंगे। वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों के अधिकारों और क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर है। उनका दावा है कि हिमालयी क्षेत्र के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।
राजधानी दिल्ली में जारी इस आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी और कई नागरिक संगठन वांगचुक के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें दोहराईं और सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। आंदोलन स्थल पर किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
सोनम वांगचुक ने अपने संबोधन में कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह लद्दाख के लोगों और वहां के पर्यावरण के भविष्य से जुड़ा एक जनहित का अभियान है। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल लद्दाख के लोगों की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए जल, जलवायु और जैव विविधता का महत्वपूर्ण स्रोत है। यदि इस क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को नुकसान पहुंचता है, तो उसका प्रभाव दूरगामी हो सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इन विषयों पर गंभीरता से विचार करते हुए स्थानीय समुदायों की चिंताओं को प्राथमिकता दी जाए।
वांगचुक ने अपने समर्थकों से संयम बनाए रखने और आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार देता है और उनका आंदोलन उसी भावना के अनुरूप चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार सार्थक बातचीत के लिए आगे आती है, तो वे संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि संसद क्षेत्र और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और आम लोगों को असुविधा से बचाने के लिए भी विशेष योजना तैयार की जा रही है। हालांकि मार्च की अनुमति और उसके अंतिम मार्ग को लेकर निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लद्दाख से जुड़े पर्यावरण, विकास और प्रशासनिक मुद्दे पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे आंदोलनों का उद्देश्य सरकार और समाज का ध्यान स्थानीय समस्याओं की ओर आकर्षित करना होता है। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाना किसी भी नीति की सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए इन मुद्दों का समाधान व्यापक संवाद, वैज्ञानिक अध्ययन और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है।
इस बीच कई सामाजिक संगठनों ने भी वांगचुक के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं प्रशासन ने लोगों से कानून का पालन करने और किसी भी अफवाह से बचने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, तो उसकी निगरानी पूरी सतर्कता के साथ की जाएगी।
सोनम वांगचुक का अनशन जारी है और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई औपचारिक बातचीत शुरू होती है या आंदोलन अपने अगले चरण में प्रवेश करता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाले घटनाक्रम राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।
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