Last updated: June 26th, 2026 at 04:58 pm

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे के उपयोग पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोपों को निराधार बताया और कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर राजनीति करना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है और इसके निर्माण को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने विपक्ष पर धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। योगी ने कहा कि मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था और पारदर्शी प्रणाली के तहत संचालित हुई है।
दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यदि किसी सार्वजनिक अभियान के तहत देशभर से चंदा एकत्र किया गया है तो उसके उपयोग को लेकर जनता के सामने स्पष्ट जानकारी रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
इस मुद्दे पर भाजपा नेताओं ने केजरीवाल के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि राम मंदिर का विषय करोड़ों लोगों की श्रद्धा से जुड़ा हुआ है और इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समय-समय पर आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करता रहा है और विपक्ष अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भाजपा की प्रतिक्रिया पर पलटवार करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी सार्वजनिक विषय पर सवाल पूछना गलत नहीं है। उनका कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही हर संस्था के लिए समान रूप से आवश्यक होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर देश के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं धार्मिक विषयों में से एक है। इसलिए इस मुद्दे पर किसी भी बड़े नेता का बयान तुरंत राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में भी यह विषय राजनीतिक विमर्श में बना रह सकता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अरविंद केजरीवाल के बीच यह बयानबाज़ी ऐसे समय में हुई है जब विभिन्न राजनीतिक दल जनता के बीच अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीतियों को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस को नई दिशा देते हैं।
फिलहाल राम मंदिर चंदे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।
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