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नीतीश कुमार से नहीं हो सकी RCP सिंह की मुलाकात, 20 मिनट इंतजार के बाद लौटे, बिहार की सियासत में हलचल तेज

बिहार की राजनीति में शनिवार को एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व
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बिहार की राजनीति में शनिवार को एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करने उनके आवास पहुंचे, लेकिन यह मुलाकात संभव नहीं हो सकी। इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

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    जानकारी के अनुसार, आरसीपी सिंह को मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश की अनुमति तो मिल गई थी, लेकिन उन्हें नीतीश कुमार से मिलने का अवसर नहीं मिला। वह लगभग 20 मिनट तक आवास परिसर में प्रतीक्षा करते रहे, जिसके बाद उन्हें यह सूचना दी गई कि पूर्व मुख्यमंत्री अन्य कार्यों में व्यस्त हैं और मुलाकात नहीं हो पाएगी। इसके बाद वे वापस लौट गए।

    इस दौरान यह भी बताया गया कि नीतीश कुमार जब अपने कमरे से बाहर आए तो उनकी नजर आरसीपी सिंह पर पड़ी। दोनों ने औपचारिक अभिवादन किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री अंदर चले गए। हालांकि इस मुलाकात को लेकर कोई विस्तृत बातचीत नहीं हुई।

    इसी बीच आरसीपी सिंह के समर्थकों ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं के हस्तक्षेप के कारण उन्हें नीतीश कुमार से मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।

    इस घटना के सामने आने के बाद जेडीयू के भीतर पुराने राजनीतिक समीकरण और रिश्तों को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। खासकर इसलिए क्योंकि कुछ महीने पहले ही आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने संबंधों को लेकर सकारात्मक बयान दिया था।

    इससे पहले भी जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का एक बयान चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने आरसीपी सिंह को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि पार्टी को अब उनकी जरूरत नहीं है। उन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव में सीटों की गिरावट के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया था।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस असफल मुलाकात ने एक बार फिर जेडीयू और आरसीपी सिंह के बीच दूरी को उजागर कर दिया है। हालांकि दोनों नेताओं के बीच अतीत में लंबे समय तक संगठनात्मक और राजनीतिक संबंध रहे हैं।

    आरसीपी सिंह लंबे समय तक जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और संगठन महासचिव रहे। बाद में वह केंद्र सरकार में मंत्री बने, लेकिन समय के साथ उनका जेडीयू से संबंध कमजोर पड़ गया। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जॉइन की और बाद में अपनी अलग राजनीतिक राह भी अपनाई। फिलहाल इस मुलाकात को लेकर बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक संकेतों पर नजर बनी हुई है।

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