Last updated: July 17th, 2026 at 10:44 am

बांग्लादेश ने बहुप्रतीक्षित तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन के साथ नया समझौता किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना के लिए चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना के साथ सरकार-से-सरकार (G2G) समझौता किया गया है। इसके तहत चीन बांग्लादेश को लगभग 7,000 करोड़ रुपये का सॉफ्ट लोन उपलब्ध कराएगा, जिसे लंबी अवधि में चुकाया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, समझौते के बाद चीन के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम बांग्लादेश पहुंच चुकी है। यह टीम मानसून के दौरान तीस्ता नदी के जल प्रवाह, कैचमेंट क्षेत्र और परियोजना से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं का सर्वे करेगी। सर्वेक्षण के आधार पर बांध, तट संरक्षण और अन्य आधारभूत ढांचे की विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।
बताया जा रहा है कि बांग्लादेश की ओर से इस मानसून में नदी के अतिरिक्त जल प्रवाह के बेहतर प्रबंधन और तलछट (सिल्ट) की सफाई में भी चीन से सहयोग मांगा गया है, ताकि भविष्य में सिंचाई और जल प्रबंधन परियोजनाओं को गति मिल सके।
इस परियोजना को लेकर भारत और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा की चर्चा भी तेज हो गई है। परियोजना क्षेत्र भारत की सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के अपेक्षाकृत निकट होने के कारण सुरक्षा विशेषज्ञ इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। कुछ रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी का क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि बांग्लादेश और चीन के बीच रक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत जारी है। हालांकि, इन संभावित समझौतों को लेकर दोनों देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
तीस्ता परियोजना पर हुए इस नए समझौते को दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इस परियोजना की प्रगति और इसके क्षेत्रीय प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।
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