Last updated: August 20th, 2026 at 05:24 pm

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रगीत के दो अंतरे ही गाएगी। इस फैसले को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है, वहीं अब शिवसेना (यूबीटी) की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी का इस मुद्दे पर रुख पहले से स्पष्ट है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वंदे मातरम् से संबंधित विधेयक लोकसभा में पेश किया जा रहा था, तब प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सदन में मौजूद क्यों नहीं थे।
आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर वंदे मातरम् को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को यह भी बताना चाहिए कि उसके कौन से क्रांतिकारी वंदे मातरम् का उद्घोष करते हुए फांसी पर चढ़े थे।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस के फैसले पर बीजेपी सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी वंदे मातरम् को राजनीतिक मुद्दा नहीं बना रही है। उनका कहना था कि कांग्रेस 1937 में लिए गए फैसले का हवाला दे रही है, जबकि मौजूदा समय 2026 है।
उन्होंने दावा किया कि जब पूरा वंदे मातरम् गाए जाने को लेकर कानून बन चुका है, तब कांग्रेस की ओर से सिर्फ दो अंतरे गाने की बात करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। बीजेपी सांसद ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस ने भी बीजेपी को दिया जवाब
बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार किया। उन्होंने रविंद्रनाथ टैगोर और सरदार पटेल का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या उन्हें राष्ट्रविरोधी कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद ही राष्ट्रगीत के दो छंदों को लेकर फैसला लिया गया था।
इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस का वंदे मातरम् के प्रति सम्मान पहले भी था और आज भी है। उन्होंने बीजेपी पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
CWC की बैठक में हुई थी चर्चा
दरअसल, बुधवार को कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC की बैठक हुई थी। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 1937 में वंदे मातरम् को लेकर पारित प्रस्ताव का उल्लेख किया।जयराम रमेश के मुताबिक, उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत, सी. राजगोपालाचारी और आचार्य नरेंद्र देव जैसे कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
कांग्रेस का कहना है कि 1937 में रविंद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया था और पार्टी आज भी उसी ऐतिहासिक रुख पर कायम है। अब वंदे मातरम् के कितने अंतरे गाए जाएं, इस मुद्दे ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। कांग्रेस, बीजेपी और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के बयानों के बाद यह विवाद आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।
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