Last updated: September 6th, 2026 at 03:12 pm

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर को एक बड़ा हादसा हो गया। यहां एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसमें कई लोग दब गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में पुलिस, दमकल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF तथा अन्य राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। शुरुआती जानकारी में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई थी, हालांकि प्रशासन ने अभी तक अंदर मौजूद लोगों की सटीक संख्या की पुष्टि नहीं की है।
हादसा दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुआ। दिल्ली पुलिस के मुताबिक करीब 1:34 बजे दक्षिण कैंपस थाने को इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके बाद दमकल की कई गाड़ियां और राहत दल तुरंत घटनास्थल पर भेजे गए। इमारत सत्य निकेतन में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास स्थित बताई गई है। यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी तथा हॉस्टल में रहते हैं।
गिरी हुई इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट यानी PG के रूप में किया जा रहा था। इसे ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से भी बताया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार इमारत में कई छात्र रहते थे। कुछ रिपोर्टों में मलबे के नीचे दर्जनों लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक संख्या अभी निर्धारित नहीं हुई है। इसी वजह से बचाव दल लगातार मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।
हादसे के बाद स्थानीय लोग भी बचाव अभियान में शामिल हो गए। कई लोगों ने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों से मलबा हटाने की कोशिश की। राहत दलों ने भी भारी मशीनों और विशेष बचाव उपकरणों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक कुछ लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। अलग-अलग समय पर जारी हुई जानकारी में मृतकों और घायलों की संख्या बदलती रही है, क्योंकि बचाव अभियान अभी जारी है। नवीनतम रिपोर्टों में कम से कम दो लोगों की मौत और कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत गिरने के बाद जोरदार आवाज हुई और कुछ ही क्षणों में पूरा ढांचा मलबे में बदल गया। आसपास धूल का गुबार फैल गया। कुछ लोगों ने मलबे के भीतर से मदद के लिए आवाजें सुनने की बात कही है। कुछ फंसे हुए लोगों के मोबाइल फोन के जरिए परिवारों और बाहर मौजूद लोगों से संपर्क करने की भी जानकारी सामने आई है। इससे बचाव दलों को संभावित स्थानों की पहचान करने में मदद मिल रही है।
हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल जांच जारी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इमारत के बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। इसी दौरान इमारत के ढहने की बात सामने आई है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी। प्रशासन निर्माण कार्य, इमारत की संरचनात्मक स्थिति और अन्य सुरक्षा पहलुओं की जांच करेगा।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा है कि DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें बचाव अभियान में जुटी हैं। आसपास की एक इमारत को भी एहतियात के तौर पर खाली कराया गया है। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
सत्य निकेतन का इलाका छात्रों की बड़ी आबादी के कारण काफी व्यस्त रहता है। संकरी गलियों और आसपास मौजूद पीजी तथा दुकानों के कारण राहत एवं बचाव वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी चुनौती का सामना करना पड़ा। पुलिस ने लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की है ताकि बचाव दलों को काम करने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके और एंबुलेंस की आवाजाही प्रभावित न हो। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण चुनौती मलबे के नीचे फंसे लोगों का जल्द से जल्द पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।
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