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रुपया 95 रुपये प्रति डॉलर के पार, पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल से बढ़ा दबाव

भारत की मुद्रा रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है। बुधवार, 9 सितंबर 2026 को कारोबार के दौरान
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भारत की मुद्रा रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है। बुधवार, 9 सितंबर 2026 को कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 रुपये के स्तर को पार कर गया। दिन के दौरान रुपया करीब 95.23 रुपये प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ, हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार आया और कारोबार के अंत में यह लगभग 95.10 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बाजार में रुपये की कमजोरी के पीछे मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है।

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    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बुधवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेला है। भारत अपनी घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारतीय आयातकों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।

     

    बाजार में रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका भी चर्चा में रही। कारोबारियों के अनुसार, आरबीआई ने डॉलर की बिक्री के जरिए बाजार में हस्तक्षेप किया, जिससे रुपये की गिरावट कुछ हद तक सीमित हुई। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक द्वारा सितंबर और अक्टूबर की अवधि वाले डॉलर-रुपया स्वैप सौदों के जरिए बैंकिंग व्यवस्था में अतिरिक्त रुपये की तरलता को कम करने की संभावना भी जताई गई है। हालांकि इन संभावित स्वैप गतिविधियों को लेकर आरबीआई की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

     

    रुपये की कमजोरी का असर केवल विदेशी मुद्रा बाजार तक सीमित नहीं रहता। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और रुपया कमजोर रहता है, तो भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों, परिवहन और कुछ औद्योगिक क्षेत्रों की लागत प्रभावित होने की संभावना रहती है। हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें कितने समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं और घरेलू बाजार में कंपनियां तथा सरकार कीमतों का कितना भार उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं।

     

    रुपये पर दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में भी बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 813.35 अंक यानी करीब 1.08 प्रतिशत गिरकर 74,764.23 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 203.60 अंक यानी करीब 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ। बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के तनाव और निवेशकों की बढ़ती चिंता का असर दिखाई दिया।

     

    विशेषज्ञों और बाजार प्रतिभागियों की नजर अब आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर रहेगी। यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है और तेल की आपूर्ति में व्यवधान की आशंका मजबूत होती है, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। दूसरी ओर, तनाव कम होने या कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने पर रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। आरबीआई की बाजार में मौजूदगी भी आने वाले सत्रों में रुपये की चाल को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक रहेगी।

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