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दिल्ली के शाहदरा थाने में हंगामे के आरोप में 15–20 वकीलों पर केस, पुलिस और वकीलों के बीच बढ़ा विवाद

  दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच विवाद ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को गंभीर रूप ले लिया। शाहदरा
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    दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच विवाद ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को गंभीर रूप ले लिया। शाहदरा पुलिस थाने में कथित हंगामे, पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्रता और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में 15 से 20 वकीलों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने पुलिस के खिलाफ एक दिन के कार्य बहिष्कार का आह्वान किया था। विवाद के केंद्र में एक वकील पर कथित हमला, आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर उठे सवाल और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर वकीलों को धमकाने के आरोप हैं।

     

    पुलिस के अनुसार, घटना 24 अक्टूबर को शाहदरा थाने में हुई थी। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) गांधी नगर मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत पर 26 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ वकीलों ने पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया, उन्हें धमकाया और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाई। पुलिस का कहना है कि घटना थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है और मामले की जांच की जा रही है।

     

    पुलिस की शिकायत के मुताबिक, विवाद की शुरुआत कड़कड़डूमा अदालत परिसर में हुई, जहां हेड कांस्टेबल अमित मलिक को कुछ वकीलों ने कथित तौर पर रोक लिया। वकीलों ने 21 अक्टूबर को दर्ज एक मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद पुलिसकर्मी थाने लौट आए। कुछ समय बाद करीब 15 से 20 वकील शाहदरा थाने पहुंचे और थाना प्रभारी के कमरे में जाकर पुलिस अधिकारियों से बहस करने लगे।

     

    शिकायत में आरोप लगाया गया कि वकीलों ने पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। पुलिस का दावा है कि विवाद के दौरान एक वकील ने थाना प्रभारी का हाथ खींचने की कोशिश की और उन्हें धमकी भी दी। पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला। हालांकि, ये सभी आरोप जांच के अधीन हैं और संबंधित वकीलों का पक्ष भी मामले में महत्वपूर्ण है।

     

    वकीलों के अनुसार, इस विवाद की पृष्ठभूमि में अधिवक्ता ललित बंसल पर कथित हमला है। बताया गया कि 23 अक्टूबर को शाहदरा इलाके में पार्किंग विवाद के बाद ललित बंसल पर हमला हुआ, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोट आई। इस घटना के संबंध में पुलिस ने अलग प्राथमिकी दर्ज की थी। वकीलों का आरोप है कि मामले में नामजद लोगों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और आरोपियों को छोड़ दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर वकील पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगने थाने पहुंचे थे।

     

    वकीलों की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि बातचीत के दौरान एसीपी ने अपना रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया। दिल्ली की जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने इस आरोप को गंभीर बताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित करने की मांग की। दूसरी ओर, पुलिस पक्ष ने वकीलों पर हंगामा करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जांच के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

     

    इस विवाद के विरोध में दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने 27 अक्टूबर को न्यायिक कार्य से दूर रहने का फैसला किया। वकीलों की समन्वय समिति ने कार्य बहिष्कार को अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान और निष्पक्ष जांच की मांग से जोड़ा। इस कदम से राजधानी की जिला अदालतों में सामान्य न्यायिक कामकाज प्रभावित हुआ।

     

    पुलिस ने वकीलों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 221, 132, 224 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, उसके कर्तव्य के निर्वहन में बल प्रयोग या हमला करने, धमकी देने और साझा मंशा से किए गए कृत्य से संबंधित हैं। प्राथमिकी दर्ज होना आरोप साबित होने के समान नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

     

    शाहदरा थाने का यह विवाद अब पुलिस और वकीलों के बीच भरोसे तथा जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। एक ओर वकील अपने साथी पर हमले के मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि थाने में अधिकारियों के काम में बाधा डाली गई। ऐसे में निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा और दोनों पक्षों के बयान दर्ज करना जरूरी होगा, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

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