Last updated: July 17th, 2026 at 03:50 pm

बिहार के चर्चित सुमिरक यादव हत्याकांड में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। गया की एक स्थानीय अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व विधायक रंजीत यादव को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। यह मामला वर्ष 2013 में सुमिरक यादव की हत्या से जुड़ा था, जिसकी सुनवाई पिछले 13 वर्षों से चल रही थी। अदालत ने उपलब्ध गवाहों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है.
अदालत के फैसले के बाद न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। बड़ी संख्या में समर्थक और स्थानीय लोग अदालत परिसर के बाहर मौजूद रहे। फैसला सुनाए जाने के बाद पूर्व विधायक के समर्थकों ने राहत जताई, जबकि पीड़ित पक्ष ने अदालत के निर्णय पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे। हालांकि अंतिम निर्णय को लेकर अभी तक अभियोजन पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सुमिरक यादव की हत्या वर्ष 2013 में हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कई लोगों को आरोपी बनाया था। जांच के दौरान पूर्व विधायक रंजीत यादव का नाम भी सामने आया और उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां पिछले कई वर्षों से गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों और अन्य प्रमाणों के आधार पर सुनवाई चल रही थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया। वहीं बचाव पक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक कारणों से मामले में फंसाया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होते हैं, जो इस मामले में पर्याप्त नहीं पाए गए।
फैसले के बाद बिहार की राजनीति में भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है। राजद नेताओं ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर उन्हें पूरा विश्वास है। दूसरी ओर विपक्ष के कुछ नेताओं ने कहा कि वे पूरे फैसले का अध्ययन करने के बाद अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि मामला एक पूर्व विधायक से जुड़ा था, इसलिए इसका राजनीतिक महत्व भी बना रहा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मुकदमे में अदालत केवल उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर निर्णय देती है। यदि अभियोजन पक्ष को अदालत के फैसले से असहमति होती है, तो उसके पास उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार सुरक्षित रहता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अंतिम कानूनी स्थिति अपीलीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होती है।
अदालत के फैसले के बाद पूर्व विधायक रंजीत यादव को इस मामले से राहत मिल गई है। हालांकि यदि अभियोजन पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करता है, तो मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है। जिला प्रशासन ने फैसले के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था कायम रखी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
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