Last updated: July 17th, 2026 at 03:56 pm

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस की संयुक्त टीम ने नकली और संदिग्ध दवाओं के एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई गोदामों और मेडिकल सप्लाई केंद्रों पर छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपये मूल्य की दवाएं, कच्चा माल, पैकेजिंग सामग्री और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। मामले में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क किन-किन जिलों तक फैला हुआ था।
अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से नकली दवाओं के कारोबार की शिकायतें मिल रही थीं। प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों को निगरानी में रखा गया और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर संयुक्त अभियान चलाया गया। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसी दवाएं मिलीं, जिनके लेबल, बैच नंबर और निर्माण संबंधी विवरण संदिग्ध पाए गए। जांच के लिए दवाओं के नमूने सरकारी प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि कुछ दवाओं की पैकेजिंग प्रतिष्ठित ब्रांडों जैसी दिखाई गई थी, जिससे उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा सके। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ये दवाएं किन-किन राज्यों में सप्लाई की जा रही थीं और इनके निर्माण में कौन-कौन लोग शामिल थे। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कई कंप्यूटर, मोबाइल फोन, बिलिंग रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेज भी जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेनदेन की जांच के माध्यम से पूरे नेटवर्क की पहचान की जाएगी। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि नकली दवाओं का कारोबार लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है। विभाग ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को केवल अधिकृत वितरकों से ही दवाएं खरीदने और प्रत्येक खरीद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आम नागरिकों से भी दवा खरीदते समय बिल लेने और पैकेजिंग की जांच करने की अपील की गई है।
दवा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाओं के खिलाफ नियमित निरीक्षण, आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम और डिजिटल सत्यापन व्यवस्था से ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए ताकि नकली उत्पाद बाजार तक न पहुंच सकें।
संयुक्त जांच टीम पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। जब्त किए गए नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था नकली दवाओं के कारोबार में शामिल पाई जाती है, तो उसके खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में भी प्रदेशभर में ऐसे विशेष अभियान जारी रखने की बात कही गई है।
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