Last updated: October 31st, 2026 at 02:29 pm

उत्तर प्रदेश के रेल यात्रियों के लिए 31 अक्टूबर 2026 का दिन बड़ी सौगात लेकर आया। वाराणसी और नई दिल्ली के बीच पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस सेवा की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी से इस आधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस नई सेवा से पूर्वी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी के बीच रात में सफर करने वाले यात्रियों को तेज, आरामदायक और आधुनिक रेल सुविधा मिलेगी। खासकर वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के जिलों के यात्रियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह ट्रेन रात में यात्रा करने और अगले दिन सुबह गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। नियमित परिचालन के लिए वाराणसी से ट्रेन रात 8 बजकर 50 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर नई दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में नई दिल्ली से ट्रेन रात 9 बजकर 40 मिनट पर चलेगी और अगले दिन सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर वाराणसी पहुंचेगी। इस तरह यात्रियों को दिन का अधिक समय अपने काम, पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के लिए मिल सकेगा।
यह ट्रेन वाराणसी से नई दिल्ली के बीच प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद में रुकेगी। इन स्टेशनों के यात्रियों को भी राजधानी तक पहुंचने के लिए एक नया विकल्प मिलेगा। रेलवे के मुताबिक, यह सेवा सप्ताह में छह दिन संचालित होगी। वाराणसी से शुक्रवार को और नई दिल्ली से शनिवार को ट्रेन नहीं चलेगी।
वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस में कुल 16 वातानुकूलित कोच लगाए गए हैं। इनमें 11 कोच एसी थ्री टियर, चार कोच एसी टू टियर और एक कोच फर्स्ट एसी का होगा। ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के सफर करने की क्षमता है। इसमें फर्स्ट एसी की 24, सेकंड एसी की 188 और थर्ड एसी की 611 बर्थ उपलब्ध होंगी। इस व्यवस्था से अलग-अलग श्रेणी के यात्रियों को अपनी जरूरत और बजट के अनुसार यात्रा का विकल्प मिलेगा।
नई ट्रेन में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक व्यवस्थाएं दी गई हैं। इसमें आरामदायक बर्थ, बेहतर सस्पेंशन सिस्टम, चार्जिंग पॉइंट, रीडिंग लाइट और आधुनिक शौचालय जैसी सुविधाएं शामिल हैं। ट्रेन में कवच सुरक्षा प्रणाली और आपातकालीन संचार व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। आपात स्थिति में यात्री ट्रेन के कर्मचारियों से संपर्क कर सकेंगे। बेहतर सस्पेंशन तकनीक का उद्देश्य तेज गति के दौरान झटकों और शोर को कम करना है।
रेलवे के अनुसार, नई सेवा मौजूदा शिव गंगा एक्सप्रेस की तुलना में वाराणसी से दिल्ली की यात्रा में लगभग 55 मिनट और दिल्ली से वाराणसी की यात्रा में लगभग 35 मिनट की बचत करेगी। इससे उन यात्रियों को विशेष लाभ होगा जिन्हें नियमित रूप से नौकरी, व्यापार, शिक्षा या अन्य कार्यों के लिए दोनों शहरों के बीच यात्रा करनी पड़ती है।
इस ट्रेन की शुरुआत से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वाराणसी देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में शामिल है। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रयागराज और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए भी बेहतर रेल संपर्क उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं, दिल्ली में पढ़ाई और नौकरी करने वाले पूर्वांचल के लोगों को भी रात में यात्रा करने का नया विकल्प मिलेगा।
रेलवे ने बताया है कि नियमित सेवा की शुरुआत और टिकटों से संबंधित विस्तृत जानकारी अलग से जारी की जाएगी। किराये की अंतिम जानकारी के लिए यात्रियों को रेलवे की आधिकारिक अधिसूचना और आरक्षण प्रणाली पर निर्भर रहना चाहिए।
वाराणसी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत उत्तर प्रदेश के रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी के बीच संपर्क भी मजबूत होगा। आने वाले समय में इस सेवा की लोकप्रियता और यात्रियों की प्रतिक्रिया से इसकी वास्तविक उपयोगिता का आकलन किया जा सकेगा।
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