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दिल्ली के सीमापुरी बिल्डिंग हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश, चार लोगों की मौत के बाद सरकारी विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में

  दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके न्यू सीमापुरी में बहुमंजिला इमारत ढहने की घटना के करीब तीन सप्ताह बाद दिल्ली सरकार
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    दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके न्यू सीमापुरी में बहुमंजिला इमारत ढहने की घटना के करीब तीन सप्ताह बाद दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। इस हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी और आसपास की तीन इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा था। दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी जिले के जिला मजिस्ट्रेट को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। जांच का उद्देश्य हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना, भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन की पहचान करना और यह तय करना है कि कहीं सरकारी विभागों या संबंधित अधिकारियों की लापरवाही तो इस दुर्घटना की वजह नहीं बनी।

     

    यह हादसा 7 अक्टूबर को दोपहर करीब तीन बजे न्यू सीमापुरी स्थित मकान संख्या E-402 में हुआ था। चार से पांच मंजिला आवासीय इमारत अचानक ढह गई और मलबे में कई लोग दब गए। स्थानीय लोगों और बचाव दल ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। इमारत एक बेहद छोटे भूखंड पर बनी हुई थी, जिसका आकार लगभग 20 से 25 वर्ग गज बताया गया है। इस घटना ने राजधानी के घनी आबादी वाले इलाकों में बने पुराने और बहुमंजिला मकानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

     

    हादसे में चार लोगों की जान चली गई। इमारत गिरने के कारण आसपास स्थित तीन अन्य आवासीय संरचनाओं को भी काफी नुकसान पहुंचा। नगर निगम दिल्ली (MCD) ने इन इमारतों को असुरक्षित घोषित कर दिया और उनमें रहने वाले लोगों को बाहर निकालकर परिसर खाली कराया। प्रारंभिक जांच में आसपास की कुछ इमारतों की संरचनात्मक स्थिति भी कमजोर पाई गई थी। अधिकारियों के सामने यह चिंता भी आई कि छोटे भूखंडों पर पर्याप्त कॉलम और बीम के बिना बहुमंजिला निर्माण किए जाने से लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

     

    प्रारंभिक स्थानीय जांच में हादसे की एक संभावित वजह पास में चल रहा अनधिकृत निर्माण और तोड़फोड़ का काम बताया गया है। जानकारी के अनुसार, पड़ोसी निर्माण स्थल पर भारी मशीनों का इस्तेमाल करके तोड़फोड़ की जा रही थी। आशंका जताई गई कि मशीनों से पैदा हुए कंपन के कारण पहले से कमजोर इमारत की संरचना प्रभावित हुई और वह ढह गई। हालांकि, यह अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं है। मजिस्ट्रेटी जांच में तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी।

     

    गृह मंत्री आशीष सूद के निर्देश पर उत्तर-पूर्वी जिले के जिला मजिस्ट्रेट हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेंगे। जांच में यह देखा जाएगा कि भवन मालिकों, किरायेदारों या अन्य निजी व्यक्तियों ने भवन निर्माण से संबंधित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित सरकारी विभागों और नागरिक एजेंसियों ने अपनी जिम्मेदारियां सही तरीके से निभाई थीं या नहीं।

     

    जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होगा कि क्या इलाके में अवैध निर्माण की जानकारी पहले से प्रशासन को थी। यदि किसी विभाग को शिकायत मिली थी, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई? क्या इमारत की संरचनात्मक स्थिति की जांच की गई थी? क्या निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन पर समय रहते कदम उठाए गए थे? इन सभी सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट के जरिए सामने लाने की कोशिश की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों, एजेंसियों या अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की जा सकती है।

     

    मजिस्ट्रेटी जांच में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी उपाय सुझाना है। दिल्ली सरकार ने प्रभावित परिवारों को सहायता देने और राजधानी में भवन सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कही है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि किसी व्यक्ति या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसे जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जाएगा।

     

    सीमापुरी की घटना दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा से जुड़ी व्यापक समस्या की ओर भी ध्यान खींचती है। राजधानी के कई घनी आबादी वाले इलाकों में छोटे भूखंडों पर कई मंजिला इमारतें बनी हुई हैं। कई जगह निर्माण की गुणवत्ता, पर्याप्त संरचनात्मक सहारे और आपातकालीन निकास जैसी सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। केवल हादसे के बाद इमारतों को असुरक्षित घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय-समय पर उनकी जांच और नियमों का प्रभावी पालन भी जरूरी है।

     

    अब सभी की नजर मजिस्ट्रेटी जांच पर है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सीमापुरी में इमारत गिरने के पीछे मुख्य कारण क्या था और इस दुर्घटना के लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है। साथ ही यह भी पता चलेगा कि भविष्य में दिल्ली के अन्य संवेदनशील इलाकों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन और नगर निगम क्या कदम उठाने की सिफारिश करते हैं।

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