Last updated: July 17th, 2026 at 10:06 am

वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियों का संकेत दिया है। संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के समक्ष दी गई प्रारंभिक प्रस्तुति में आयोग ने कहा कि यदि उसे छह महीने का अग्रिम समय दिया जाए, तो वह लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने के लिए तैयार है।
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक तैयारी के लिए छह महीने का समय पर्याप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर समिति की आगामी बैठकों में विस्तार से विचार किया जाएगा।
पी.पी. चौधरी के अनुसार, यदि संसद वर्ष 2028 तक इस संबंध में आवश्यक कानून पारित कर देती है, तो 2029 से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ व्यवस्था लागू किए जाने की संभावना बन सकती है।
उन्होंने बताया कि समिति ने लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय विचार-विमर्श के दौरान विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, संवैधानिक विशेषज्ञों, कानूनविदों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और मीडिया से भी सुझाव प्राप्त किए। विशेषज्ञों का मत था कि यह प्रस्ताव संविधान की मूल संरचना, संघीय व्यवस्था या लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध नहीं है, बल्कि चुनावों के लिए एक समान समय-सारिणी तय करने का प्रयास है।
पी.पी. चौधरी ने यह भी कहा कि देश में पहले भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा चुके हैं। उनके अनुसार, भारतीय मतदाता जागरूक हैं और एक साथ चुनाव होने की स्थिति में भी वे अपने मताधिकार का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकते हैं।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत हैं। ऐसे में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला संसद में होने वाली चर्चा और विधायी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
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